Nag Diwali 2025: नाग दिवाली क्या है, क्यों मनाई जाती है?
Nag Diwali 2025: जैसे कि पूरे भारतवर्ष में दीपावली मनाई जाती है और दीपावली का त्यौहार पांच दिन तक लोग पूरे हर्षोल्लाष के साथ मनाते है। ऐसे ही दीपावली के कुछ दिन बाद नाग दीपावली मनाई जाती है जिसके बारे में कम ही लोग जानते है। नाग दीपावली भारत के कुछ राज्यों में विशेष रूप से मनाई जाती है।
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नाग दीपावली को लोग अपने घरो में रंगोलिया बनाकर दीप भी जलाते है और पूरे विधि विधान से पूजा भी करते है।
नाग दीपावली उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु मानते हैं कि नाग देवता पृथ्वी से आकर लोगों की रक्षा करते हैं और घरों में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
नाग दीपावली क्यों मनाई जाती है? (Why Naag diwali celebrated):
नाग दीपावली कार्तिक मास के अगले दिन मनाई जाती है। प्रत्येक वर्ष नाग दीपावली अलग अलग दिन भारतीय पंचांग के अनुसार मनाई जाती है। पुराणिक कथा और धार्मिक परम्पराओ के अनुसार नाग दीपावली सर्प देवता को खुश करने के लिए मनाते है। जिससे कुंडली में लगे सर्प दोष, विवाह दोष और नौकरी न लगना ये सभी दोष दूर हो जाते है इसलिए लोग नाग पंचमी को पूरे भाव के साथ मनाते है।
नाग दीपावली का महत्व (Nag Diwali 2025):

हिंदू धर्म में नाग देवता को शक्ति, धन, रक्षा और उर्वरता का प्रतीक माना गया है।पौराणिक कथाओ के अनुसार शिव जी के गले में जो सर्प है, वह नागराज वासुकी हैं, जो सम्पूर्ण सर्प कुल के अधिपति हैं।
नाग दीपावली इस बात का प्रतीक है कि जैसे हम लक्ष्मी पूजन से धन की प्राप्ति चाहते हैं, वैसे ही नाग पूजन से भय, विष, और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा की कामना करते हैं।
कथाओ के अनुसार इस दिन नाग लोक में भी दीप उत्सव मनाया जाता है। विष्णु भगवान् जी ने शेषनाग पर ही विश्राम किया था इसलिए कहा जाता है की नाग दीपावली पैर पूजा करने से विष्णु भगवान् भी प्रसन्न हो जाते है।
पपौराणिक कथाओ के अनुसार नागो को पाताल लोक का स्वामी भी मन जाता है जिस कारण इस दिन पूजा करने से पाताल लोक के देवताओ का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नाग दीपावली कब मनाई जाती है?-
नाग दीपावली मुख्यत रूप से देव दीपावली के बीस दिन बाद मनाई जाती है जो कि भारतीय पंचाग के अनुसार कार्तिक मास के अगले दिन मनाई जाती है इस वर्ष 2025 में, 25 नवंबर को नाग दीपावली मनाई जाएगी। संयोग से इस दिन विवाह पंचमी भी मनाई जा रही है।
नाग दीपावली पूजन विधि:-
पूजन सामग्री:
नाग देवता की प्रतिमा या चित्र
दूध, कच्चा दूध या घी
दूर्वा घास
चंदन, अक्षत (चावल), पुष्प
दीपक और धूप
प्रसाद (गुड़, दूध, लड्डू आदि)
पूजा विधि:
सूर्योदय से पहले स्नान करें और घर को साफ करें।
घर के उत्तर-पूर्व कोने या तुलसी के पास पूजा स्थान बनाएं।
नाग देवता का चित्र रखें और दीपक जलाएं।
चंदन, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें।
दूध या घी का अभिषेक करें।
मंत्र जाप करें —
ॐ नमः नागदेवाय नमः
पूजा के बाद दीप जलाकर घर के चारों ओर रखें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर रहे।
नाग दीपावली से जुड़े लोक रीति-रिवाज:
- 1.ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मिट्टी से नाग बनाते हैं और उनकी पूजा विधि अनुसार करते हैं।
- 2.घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- 3.कई जगह इस दिन सांपों को दूध पिलाया जाता है।
- 4.महिलाएँ नाग-नागिन की कहानियाँ सुनती हैं और संतान सुख की मनोकामना भी करती हैं।
नाग दीपावली और आध्यात्मिक अर्थ:-
नाग दीपावली केवल सर्प की पूजा नहीं बल्कि अध्यात्म और ऊर्जा के प्रतीक हैं।
योग शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य के भीतर “कुंडलिनी शक्ति” सर्प के समान कुण्डली मारकर स्थित होती है।
नाग दीपावली का अर्थ है — अपने भीतर की कुंडलिनी शक्ति को प्रकाशमान करना, अंधकार से बाहर आना, और आत्मज्ञान की ओर बढ़कर जीवन को सरल बनाना।
निष्कर्ष:
Nag Diwali 2025 केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का पर्व है।
यह हमें सिखाती है कि जैसे दीप अंधकार को मिटाता है, वैसे ही श्रद्धा और भक्ति हमारे भीतर के भय, क्रोध और अहंकार को मिटा सकती है।जिससे हमारे जीवन में सरलता और उदार भाव आते है।
इस नाग दीपावली पर नाग देवता की आराधना करें और अपने जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और शांति का स्वागत करें।
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