रामायण

Shiv Tandav Stotram | शिव तांडव स्तोत्रम् हिंदी में अर्थ के साथ

Shiv Tandav Stotram | शिव तांडव स्तोत्रम् हिंदी में अर्थ के साथ, शिव तांडव स्तोत्र

शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) भगवान शिव की स्तुति में दानव राजा रावण द्वारा लिखित और गाया गया एक भजन है। शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) भगवान शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतिनिधित्व करता है जो सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है। भजन में 17 श्लोक हैं और प्रत्येक श्लोक में निडर शिव और उनकी शाश्वत सुंदरता का विस्तार से वर्णन किया गया है।

वह भगवान शिव के सबसे उत्साही भक्तों में से एक थे। शिव तांडव स्तोत्र सदियों पहले रावण ने लिखा था। रावण महान भारतीय महाकाव्य रामायण में भगवान राम की पत्नी सीता के अपहरण के लिए कुख्यात था। रावण के अहंकारी पक्ष को ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन भगवान शिव के प्रति उसकी भक्ति के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। यहाँ, हम रावण की भक्ति पर एक गहराई से नज़र डालते हैं, जो भगवान शिव का सबसे महान भक्त था।

जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावित स्थले
गलेऽव लम्ब्य लम्बिताम भुजंग तुंग मालिकाम्‌ |
डमड्ड मड्ड मड्ड मन्नी नाद वड्ड मर्वयम
चकार चंडतांडवम तनोतु नः शिवः शिवम्‌ || 1 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): उनके सुन्दर बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र हो रहा है, और उनके गले में सांप है जो एक हार की तरह लटका मालूम पड़ता है, और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है, भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको सुख संपन्नता प्रदान करें।

जटा कटा हसम भ्रमम भ्रमन्नि लिंपनिर्झरी
विलोलवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि ||
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ल ललाट पट्टपावके
किशोर चंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: || 2 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): मैं शिव का बड़ा भक्त हूँ, जिनका शीशअलौकिक और पूज्यनीय गंगा नदी की बहती लहरों की धाराओं से सुशोभित है, जो उनकी बालों की उलझी जटाओं की गहराई में उमड़ रही हैं, जिनके मस्तक पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित है, और जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण धारण करते हैं।

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधु बंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मान मानसे ||
कृपा कटाक्ष धारणी निरुद्ध दुर्धरापदि
कवचिद दिगम्बरे मनो विनोद मेतु वस्तुनि || 3 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): मेरा मन भगवान शिव में ही सदा अपनी प्रसन्नता को पाए, अद्भुत ब्रह्माण्ड के सारे प्राणी जिनके मन में मौजूद हैं, जिनकी अर्धांगिनी स्वयं पर्वतराज की पुत्री पार्वती हैं, जो अपनी करुणा दृष्टि से असाधारण आपदा को नियंत्रित करते हैं, जो सर्वत्र व्याप्त है, और जो दिव्य लोकों को वस्त्र की तरह धारण करते हैं।

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणा मणिप्रभा-
कदंब कुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्व धूमुखे ||
मदांध सिंधु रस्फुरत्व गुत्तरीय मेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि || 4 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): जिनकी जटा पर लाल और भूरे सर्प मणियों से चमकता फन फैलाये हुए बैठे हैं जो सभी देवियों के चेहरों पर विभिन्न रंग बिखेर रहा है, जिनका ऊपरी वस्त्र मंद पवन में मदमस्त हाथी की त्वचा (skin) की भांति हिल रहा है, जो सभी जीवों के रक्षक हैं मेरा मन उनके इस तांडव से पुलकित और आभारित हो रहा है।

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रि पीठभूः ||
भुजंगराज मालया निबद्ध जाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः || 5 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): भगवान शिव हमें संपन्नता और खुशियां दें, जिनका मुकुट स्वयं चंद्रमा है, जिनके बाल लाल नाग के हार से बंधे हुए हैं, जिनका पायदान फूलों की धूल के बहने से गहरे रंग का हो गया है, जो स्वयं इंद्र, विष्णु और अन्य देवताओं के सिर से गिरती है।

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजय स्फुरिगभा-
निपीत पंचसायकम निमन्निलिंप नायम्‌ ||
सुधा मयुख लेखया विराज मानशेखरं
महाकपालिसंपदे  शिरोजटालमस्तुनः  || 6 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): शिव के बालों की उलझी जटाओं से हम सिद्धि प्राप्त हो, जिन्होंने कामदेव को अपने माथे से निकने वाली ज्वाला से नष्ट किया था, जो सारे देवलोकों के स्वामियों द्वारा आदरणीय हैं, और अर्ध-चंद्र से सुशोभित हैं।

कराल भाल पट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृत प्रचंड पंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्र चित्र पत्रक-
प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम || 7 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): मैं भगवन शिव का बड़ा भक्त हूँ, जिनके तीन नेत्र हैं, जिन्होंने शक्तिशाली कामदेव को अग्नि को समर्पित कर दिया, उनके मस्तक की सतह डगद् डगद् की घ्वनि से जलती है, वे ही एकमात्र कलाकार है जो पर्वतराज की पुत्री पार्वती के स्तन की नोक पर, पत्रभंग रचना खींचने में निपुण हैं। उन भगवान त्रिलोचन में मेरा सदैव ही मन लगा रहे।

Shiv Tandav Stotram | शिव तांडव स्तोत्रम् हिंदी में अर्थ के साथ, शिव तांडव स्तोत्र

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्ध रस्फुर-
त्कुहु निशीथि नीतमः प्रबंध बंधु कंधरः ||
निलिम्प निर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कला निधान बंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः || 8 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): भगवान शिव हमें संपन्नता दें, वे ही पूरे संसार का भार उठाते हैं, जिनकी शोभा चंद्रमा है, जिनके पास अलौकिक गंगा नदी है, जिनके कंठ में नवीन मेघमाला से घिरी हुई अमावस्या की आधी रात के समय फैलते हुए अंधकार के समान कालिमा अंकित है।

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंच कालि मच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंध कंधरम्‌ ||
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे || 9 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा है, जिनका कंठ खिले हुए नील कमल गरिमा से श्याम प्रभा का अनुकरण करने वाला है। जो कामदेव संहार करने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया, जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया, जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं, और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया, उन्हें मैं भजता हूँ।

अखर्व सर्वमंगला कला कदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ||
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांत कांध कांतकं तमंत कांतकं भजे || 10 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनके चारों ओर भँवरे हैं शुभ कदंब के फूलों के सुंदर गुच्छे से आने वाली शहद की मधुर सुगंध के कारण, जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया, जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया, जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं, और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया, उन्हें मैं भजता हूँ।

जयत्वद भ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंग मश्वसद,
विनिर्ग मक्र मस्फुरत्कराल भाल हव्यवाट्,
धिमिन्ध मिधि मिन्ध्व नन्मृदंग तुंगमंगल-
ध्वनि क्रम प्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः || 11 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): शिव के धीमे धीमे बजते हुए मृदंग के गंभीर मंगल स्वर के साथ जिनका प्रचंड तांडव हो रहा है, जिनके महान मस्तक पर अग्नि है, वो अग्नि फैल रही है नाग की सांस के कारण, गरिमामय आकाश में गोल-गोल घूमती हुई।

दृषद्विचित्र तल्पयोर्भुजंग मौक्तिकम स्रजो-
र्गरिष्ठरत्न लोष्टयोः सुहृद्विपक्ष पक्षयोः ||
तृणार विंद चक्षुषोः प्रजा मही महेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे || 12 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): मैं कब सदाशिव को भजूँगा, शाश्वत शुभ देवता, जो रखते हैं प्रजा और पृथ्वी के राजाओं में समान भाव, घास के तिनके और कमल के प्रति, मित्रों और शत्रुओं के प्रति, सर्वाधिक मूल्यवान रत्न और धूल के ढेर के प्रति, सांप और हार के प्रति और विश्व में विभिन्न रूपों के प्रति?

Shiv Tandav Stotram | शिव तांडव स्तोत्रम् हिंदी में अर्थ के साथ, शिव तांडव स्तोत्र

कदा निलिं पनिर्झरी निकुज कोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्त लोल लोचनो ललाम भाल लग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌ || 13 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): सुन्दर मस्तक वाले भगवान चन्द्रशेखर में मन को एकाग्र करके अपने कुविचारों को त्यागकर गंगा जी के तटवर्ती वन के भीतर रहता हुआ, हाथ जोड़ डबडबाई हुई विह्वल आँखों से शिव मंत्र का उच्चारण करता हुआ मैं कब सुखी होऊंगा ?

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फ निर्भक्षरन्म धूष्णिका मनोहरः ||
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनीं महनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः || 14 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): देवांगनाओं के सिर में गुंथे कदम्ब के पुष्पों की मालाओं के झड़ते सुगन्धित पराग से मनोहर, शोभा के धाम महादेव के अंगों की सुंदरता आनंदयुक्त हमारे मन की प्रसन्नता और हमारी सम्पन्नता को सदा बढ़ाती रहे।

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्ट सिद्धि कामिनी जनावहूत जल्पना ||
विमुक्त वाम लोचनो विवाह कालिक ध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ || 15 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): समुद्र की अग्नि की भांति हमारे सारे पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अणिमादिक अष्ट महासिद्धियों और चंचल नेत्रों वाली देवकन्याओं से शिव विवाह समय में गान की गयी मंगल ध्वनि सब पर मन्त्रों में श्रेष्ठ शिव मन्त्र से परिपूर्ण होकर हम सांसारिक दुखों को नष्ट कर विजय पाएं।

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌ ||
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम् || 16 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): इस शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) को, जो भी पढ़ता है, याद करता है और और दूसरे व्यक्ति को सुनाता है, वह सदा के लिए पवित्र हो जाता है और स्वयं शिव की भक्ति और प्रेम को पाता है। शिव की भक्ति के लिए कोई दूसरा मार्ग या उपाय नहीं है। बस शिव का विचार ही ऐसे भ्रमों को दूर कर देता है।

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ||
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः || 17 ||

हिंदी में अर्थ (Meaning in Hindi): सायंकाल में पूजा समाप्त होने के बाद जो रावण द्वारा रचित इस शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ करता है, भगवान शंकर उस मनुष्य को रथ, हाथी, घोड़ों से युक्त सदा स्थिर रहने वाली संपत्ति प्रदान करते हैं।

भगवान शिव का कितना अद्भुत वर्णन है! इस तरह के विवरण आमतौर पर उनके द्वारा लिखे जाते हैं जो प्रेम या भक्ति में डूबे होते हैं। क्या आपने सोचा है कि इस खूबसूरत शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) के रचयिता कौन हैं? राजा रावण!

इसे भी पढ़ें: रामायण से जुड़ी 15 लघु कहानियां जो आपको चकित कर देंगी, 15 Stories of Ramayana in Hindi

इसे भी पढ़ें: रामायण से जुड़ी 15 लघु कहानियां जो आपको चकित कर देंगी, 15 Best Stories of Ramayana in Hindi

Recent Posts

List of National Parks in India भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की सूची

इस पोस्ट में हम आपको List of National Parks in India भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की सूची बताएंगे। राष्ट्रीय उद्यान…

India GK – भारत का सामान्य ज्ञान

जैसा कि हम जानते हैं कि सामान्य ज्ञान (GK), India GK देश में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में एक बहुत…

भारत की सबसे बड़ी झील कौन सी हैं?

इस पोस्ट में हम आपको भारत की सबसे बड़ी झील कौन सी हैं (Biggest lake in India or Largest lake…

महामृत्युनजय मंत्र हिंदी में अर्थ सहित Mahamrityunjay Mantra

कहा जाता है कि महा मृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay Mantra) को मार्कंडेय ऋषि ने खोजा था। यह एक गुप्त मंत्र था…

उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला (UP ka Sabse bada Jila)

इस पोस्ट में हम आपको उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला कौन सा है (UP ka Sabse bada Jila Kaun…

Gayatri Mantra with Meaning in Hindi गायत्री मंत्र हिंदी में अर्थ के साथ

गायत्री मंत्र सार्वभौमिक (universal) मंत्र है, गायत्री मंत्र प्रकाश के रूप में सर्वोच्च वास्तविकता को संबोधित करता है। यह किसी…